
चंबा। हिमाचल प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ की बैठक बीआरसी कार्यालय में आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता विभाग के डिप्टी डीओ ओपी हीर ने की। इस मौके पर अध्यापकों की समस्याओं पर चर्चा की गई। बैठक में सीधी भर्ती का मुद्दा खूब उठा और इसे रद करने के लिए आवाज भी उठाई गई। अध्यापक संघ के प्रधान राजीव राठौर और महासचिव मुकेश शर्मा ने बताया कि सरकार स्कूलों में कार्यरत करीब 20 हजार विज्ञान अध्यापकों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हैडमास्टरों के केवल 1083 पद स्वीकृत हैं, जबकि दो हजार के काडर के लिए 828 रिक्त हैडमास्टरों के पद काडर के साथ अन्याय है। प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग इस पर विचार नहीं कर रहा है। इससे प्रदेश में कार्यरत वरिष्ठ ही नहीं, बल्कि युवा विज्ञान अध्यापकों को भी अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। हैडमास्टरों की अगर सीधी भर्ती होती है तो उनका पदोन्नत होना असंभव है। प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग की गलत नीतियों के कारण उन्हें काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही है। सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में हैडमास्टरों के 236 पद स्वीकृत हैं। इन्हें अभी तक बहाल नहीं किया गया है। टीजीटी कैडर 15 साल से वेतन विसंगति का सामना कर रहा है। इसे दुरुस्त करने की उसकी मांग सरकार के पास लंबित पड़ी है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि 20 हजार के इस कैडर की मांगों को पूरा करके उन्हें न्याय दिया जाए।
ये हैं संघ की मुख्य मांगें
212 पदों की सीधी भर्ती को रद करना, अनुबंध और पैरा अध्यापकों को पांच साल के सेवाकाल के बाद नियमित करना, प्रेक्टिकल भत्ता 500 रुपये करना या मूल वेतन में समायोजित करना, 15 साल बाद दो अग्रिम वेतन वृद्धियां देना और वेतन विसंगतियां दूर करना, पंजाब की तर्ज पर भत्ते जारी करना, वर्ष 2003 के बाद कर्मचारियों को पेंशन न दिए जाने संबंधी अध्यादेश को वापस लेना।
